20 November Class 10th Science Question Paper Sent Up exam 2025
| Bihar Board | Class 10th |
| Sent-Up | Exam 2025 |
| Subject | Science |
| Exam Date | 20.11.2025 |
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बिहार बोर्ड कक्षा 10वीं सेंट अप परीक्षा 2025 | रूटिन प्रश्नपत्र और सिलेबस देखें:-

Bihar Board 10th Sent Up Exam .इस पोस्ट में बिहार बोर्ड से आयोजित सेंट अप परीक्षा 2025 का प्रश्न पत्र दिया गया है। तो जितने भी छात्र-छात्राएं मैट्रिक की परीक्षा 2026 में बिहार बोर्ड से देंगे। तो आपके लिये स्कूल स्तर पर sent up exam 2025 का आयोजन 19 से 22 नवंबर तक हो रहा है।
Bihar Board 10th Sent Up Exam November 2025
जितने भी छात्र-छात्राएं 10th की वार्षिक परीक्षा 2026 में सम्मिलित होने जा रहे हैं। उसे पहले उनको नवंबर महीने सेंट अप परीक्षा देना होगा।
Question कहां से आएगा ?
कक्षा 10वीं के सेंट अप परीक्षा 2025 का प्रश्न पत्र में 100% पुरे सिलेबस से प्रश्न रहेगा |
कॉपी का जांच कहां होगा ?
मैट्रिक के सेंट अप परीक्षा के कॉपी का मूल्यांकन आपके विद्यालय के स्तर पर ही होगा।
Sent Up Exam 2025-EXAM CENTER
इस परीक्षा का आयोजन आपके विद्यालय के स्तर पर होगा। अर्थात की जिस भी विद्यालय में आपका नामांकन है। उसी में जाकर आपको परीक्षा देना होगा ।
Class 10th Admit Card Sent Up Exam 2025
इस परीक्षा के लिए बिहार बोर्ड के तरफ से कोई भी ऑफिशियल एडमिट कार्ड जारी नहीं किया जाएगा। क्योंकि यह आपके विद्यालय के स्तर पर आयोजित होने वाला सेंट अप जांच परीक्षा है।
सेंट अप परीक्षा नहीं देंगे तो क्या होगा ?
बोर्ड ने साफ सुथरे शब्दों में सभी विद्यालय को निर्देश दिया हैं, यदि कोई छात्र/छात्रा परीक्षा में शामिल नहीं होंगे तो उनको किसी भी परिस्थिति में फाइनल परीक्षा में भाग नहीं ले सकते हैं
क्या सेंट अप परीक्षा के कॉपी Check होता हैं?
जी हां, जब आपकी परीक्षा सम्पन्न हो जाती हैं, तब आपके कॉपी को आपके विद्यालय/कॉलेज के शिक्षकों के द्वारा चेक की जाती हैं। तथा इसका फाइनल रिजल्ट बोर्ड ऑफिस को भेजा भी जाता हैं।
सेंट अप परीक्षा का महत्व
यदि आप भी कक्षा 10वी की सेंट अप परीक्षा देने जा रहे हैं या देने वाले हैं तो आप सभी को इस परीक्षा में भाग लेना अति आवश्यक है सेंट अप परीक्षा का उद्देश्य छात्रों की आगे की कक्षा में प्रवेश तथा वार्षिक परीक्षा से पहले उसकी तैयारी को जांच किया जाए और तैयारी को बेहतर किया जाए ताकि वह आगे परीक्षा में किसी भी प्रकार में उनको दिक्कत ना हो और उनको जो भी दिक्कत है वह उसको सुधार सके इसलिए सेंट अप परीक्षा लिया जाता है
Bihar Board – यदि कोई विद्यार्थी Sent-up परीक्षा में शामिल नहीं होते हैं अथवा अनुत्तीर्ण (FAIL) हो जाते हैं तो वैसे विद्यार्थी वार्षिक परीक्षा, 2026 में सम्मिलित होने से वंचित हो जाएंगे।
Class 10th Sent Up Exam Science Objective Answer Key 2025
| 1.B | 11.B | 21.A | 31.B | 41.B |
| 2.B | 12.C | 22.A | 32.B | 42.D |
| 3.C | 13.A | 23.C | 33.B | 43.D |
| 4.C | 14.A | 24.B | 34.C | 44.A |
| 5.B | 15.B | 25.D | 35.B | 45.A |
| 6.B | 16.B | 26.C | 36.B | 46.C |
| 7.B | 17.B | 27.C | 37.C | 47.C |
| 8.C | 18.D | 28.D | 38.D | 48.C |
| 9.C | 19.A | 29.B | 39.C | 49.D |
| 10.D | 20.A | 30.B | 40.D | 50.A |
Science Subjectives Question
1.उत्तर_उत्तल दर्पणों का उपयोग सामान्यतः वाहनों के पश्च-दृश्य (wing) दर्पणों के रूप में करते हैं। इनमें ड्राइवर अपने पीछे के वाहनों को देख सकते हैं जिससे वे सुरक्षित रूप से वाहन चला सकें। उत्तल दर्पणों को इसलिए भी प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि ये सदैव सीधा, प्रतिबिम्ब बनाते हैं लेकिन वह छोटा होता है।
2.उत्तर_अंतरिक्ष यात्री को आकाश काला दिखाई देता है क्योंकि अंतरिक्ष में वायुमंडल नहीं होता, जिससे सूर्य के प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं होता। पृथ्वी पर, वायुमंडल में मौजूद कण सूर्य के प्रकाश को बिखेरते हैं, जिससे नीले रंग का प्रकाश अधिक फैल जाता है और हमें आकाश नीला दिखाई देता है, लेकिन अंतरिक्ष में इस प्रकीर्णन की अनुपस्थिति के कारण ही आकाश काला दिखता है
3.उत्तर_उत्तल लेंस का मुख्य फोकस वह बिंदु है जो लेंस के मुख्य अक्ष पर स्थित होता है। जब मुख्य अक्ष के समानांतर प्रकाश की किरणें इस लेंस पर पड़ती हैं, तो वे अपवर्तन के बाद इसी बिंदु पर आकर मिल जाती हैं (अभिसरित होती हैं)। इस बिंदु को ही उत्तल लेंस का मुख्य फोकस कहते हैं।
4.उत्तर_उत्तम ईंधन की दो विशेषताएँ हैं: उच्च कैलोरी मान और सुलभता। एक अच्छे ईंधन को प्रति इकाई द्रव्यमान से अधिक ऊष्मा उत्पन्न करनी चाहिए (उच्च कैलोरी मान) और वह सस्ता व आसानी से उपलब्ध होना चाहिए।
10.उत्तर_किसी चालक तार का प्रतिरोध चार मुख्य बातों पर निर्भर करता है: चालक की लंबाई, उसके अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल, चालक के पदार्थ की प्रकृति और उसका तापमान। लंबाई के सीधे समानुपाती, अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती, और पदार्थ की प्रकृति तथा तापमान से प्रभावित होता है।
चालक की लंबाई (Length): प्रतिरोध तार की लंबाई के समानुपाती होता है। इसका मतलब है कि अगर तार की लंबाई दोगुनी की जाए, तो उसका प्रतिरोध भी दोगुना हो जाएगा।
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल (Cross-sectional area): प्रतिरोध अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसका मतलब है कि तार जितना मोटा होगा, उसका प्रतिरोध उतना ही कम होगा। मोटे तार में विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित हो सकती है।
पदार्थ की प्रकृति (Nature of material): प्रत्येक पदार्थ की अपनी एक विशिष्ट प्रतिरोधकता होती है जो उसके पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, तांबे जैसे उत्कृष्ट चालक का प्रतिरोध चांदी से बने तार की तुलना में अधिक होगा। मिश्र धातुओं का उपयोग अक्सर उनके उच्च प्रतिरोध और उच्च गलनांक के कारण तापन अवयवों में किया जाता है।
चालक का तापमान (Temperature): चालक का प्रतिरोध तापमान पर भी निर्भर करता है। अधिकांश चालकों के लिए, तापमान बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ जाता है
11.उत्तर_रासायनिक समीकरण के कई फायदे हैं, जैसे यह रासायनिक अभिक्रिया को संक्षिप्त और स्पष्ट रूप से दर्शाता है, अभिकारकों और उत्पादों की मात्राओं (मोल्स और द्रव्यमान) की गणना में मदद करता है, और पदार्थ की भौतिक अवस्थाओं को इंगित करता है। ये समीकरण अभिक्रिया की परिस्थितियों, जैसे तापमान, दाब और उत्प्रेरक, के बारे में भी जानकारी दे सकते हैं।
14.उत्तर_निस्तापन एक नियंत्रित प्रक्रिया है जिसमें अयस्क को हवा की अनुपस्थिति में गर्म किया जाता है, जबकि संक्षारण एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमें धातुएँ पर्यावरण के साथ प्रतिक्रिया करके क्षय हो जाती हैं। निस्तापन में कार्बोनेट अयस्क से \(CO_{2}\) और हाइड्रेटेड अयस्क से पानी को हटाया जाता है। इसके विपरीत, संक्षारण एक स्वाभाविक और अनायास होने वाली रासायनिक प्रक्रिया है।
16.उत्तर_साबुनीकरण वसा या तेल (ट्राइग्लिसराइड) को एक मजबूत क्षार, जैसे सोडियम हाइड्रॉक्साइड, के साथ मिलाकर साबुन और ग्लिसरॉल बनाने की एक रासायनिक प्रक्रिया है। यह एक जलीय क्षार द्वारा एस्टर के हाइड्रोलिसिस (जल-अपघटन) की प्रक्रिया है, जिसमें वसा के एस्टर टूटते हैं। इस अभिक्रिया के परिणामस्वरूप साबुन बनता है
20.उत्तर_मेंडलीव की आवर्त सारणी के मुख्य लाभों में तत्वों के अध्ययन में सुविधा, उनके गुणों की भविष्यवाणी, और कुछ तत्वों के परमाणु द्रव्यमान को ठीक करने में मदद करना शामिल है। इसने नए तत्वों की खोज को भी प्रोत्साहित किया और आधुनिक आवर्त सारणी की नींव रखी। तत्वों का व्यवस्थित अध्ययन: सारणी ने समान रासायनिक गुणों वाले तत्वों को एक ही समूह में रखकर तत्वों के अध्ययन को सरल और व्यवस्थित बनाया।नए तत्वों की भविष्यवाणी: मेंडलीव ने अपनी सारणी में उन तत्वों के लिए खाली स्थान छोड़े जो उस समय ज्ञात नहीं थे और उनके गुणों की भविष्यवाणी भी की। बाद में इन तत्वों की खोज हुई, जैसे कि गैलियम और जर्मेनियम।परमाणु भार में सुधार: इसने कुछ तत्वों के परमाणु भारों को ठीक करने में मदद की, जैसे बेरिलियम का परमाणु भार \(9.0\) पर ठीक किया गया (पहले \(13.5\) माना जाता था)।
21.उत्तर_श्वसन और दहन में दो मुख्य अंतर यह हैं कि श्वसन एक धीमी, नियंत्रित, जैविक प्रक्रिया है जो सजीवों में होती है, जबकि दहन एक तीव्र, अनियंत्रित, रासायनिक प्रक्रिया है जो निर्जीव पदार्थों में होती है। श्वसन में ऊर्जा धीरे-धीरे एटीपी और ऊष्मा के रूप में निकलती है, जबकि दहन में ऊर्जा बहुत तेज़ी से ऊष्मा और प्रकाश के रूप में निकलती है।
22.उत्तर_विषमपोषी वे जीव हैं जो अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते और जीवित रहने के लिए भोजन के लिए दूसरे जीवों पर निर्भर रहते हैं। ये जीव ऊर्जा और कार्बनिक यौगिकों को प्राप्त करने के लिए अन्य जीवित या मृत जीवों का उपभोग करते हैं।
26.उत्तर_पुमंग फूल का नर प्रजनन अंग है, जबकि जायांग मादा प्रजनन अंग है। पुमंग परागकण उत्पन्न करता है जिसमें नर युग्मक होते हैं, और जायांग बीजांड उत्पन्न करता है जिसमें मादा युग्मक (अंडाणु) होते हैं। ये दोनों फूल के प्रजनन चक्र के आवश्यक भाग हैं
28.उत्तर_पर्यावरण की सुरक्षा के लिए, व्यक्ति और समुदाय मिलकर कई कदम उठा सकते हैं, जैसे कि प्लास्टिक का उपयोग कम करना, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना, और ऊर्जा बचाना। इसके अतिरिक्त, अधिक पेड़ लगाना, रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना, और जैविक खादों का उपयोग करना भी पर्यावरण की रक्षा में मदद कर सकता है
30.उत्तर_मानव में बच्चों का लिंग निर्धारण पुरुष के लिंग गुणसूत्रों ((Y)) द्वारा होता है। महिला के पास (XX) गुणसूत्र होते हैं और पुरुष के पास \(XY\) गुणसूत्र होते हैं। जब पिता का (Y) गुणसूत्र शुक्राणु और मां के (X) गुणसूत्र अंडाणु के साथ मिलते हैं, तो लड़का (XY) पैदा होता है, और जब पिता का (X) गुणसूत्र शुक्राणु और मां के (X) गुणसूत्र अंडाणु के साथ मिलते हैं, तो लड़की (XX) पैदा होती है।
