Bihar Board 12th Hindi Vvi Subjective Question 2026

Bihar Board 12th Hindi Vvi Subjective Question 2026

इस पोस्ट के माध्यम से बिहार बोर्ड 12th हिन्दी के सबसे महत्वपूर्ण Subjective प्रश्न उत्तर दिया गया है जो फाइनल परीक्षा के महत्वपूर्ण हैं तो ये सभी प्रश्न को याद कर ले 

1.अगर हममें वाक्शक्ति न होती, तो क्या होता ?

उत्तरः ईश्वर द्वारा प्रदत्त शक्तियों में वाक्शक्ति मनुष्य के लिए वरदान है। वाक्शक्ति के अनेक फायदों में ‘स्पीच’, वक्तृता और बातचीत दोनों का समावेश होता है। वाक्रशक्ति के अभाव में श्रृष्टि गूँगी रहती। वाक्शक्ति के अभाव में मनुष्य सुख-दुख का अभाव अन्य इन्द्रियों के द्वारा करता है और सबसे विकट स्थिति तो आपस में संवादहीनता की स्थिति होती। बातचीत जहाँ दो आदमी का प्रेमपूर्वक संलाप है, वाक्शक्ति के अभाव में चुटीली व्यंग्यात्मक बात कहकर तालियाँ बटोरना भी संभव न होता।

 

 

2.उसने कहा था’ कहानी का प्रारंभ कहाँ और किस रूप में होता है?

उत्तरः ‘उसने कहा था’ कहानीकार चन्द्रधर शर्मा गुलेरी की अमर कथा-रचना है। यही वह कालजयी रचना है, जिससे आधुनिक हिन्दी कहानी का आरंभ होना मान्य है। इस कहानी का प्रारंभ अमृतसर के भीड़ भरे बाजार से होता है, जहाँ बम्बू काँटे-वालों के बीच से होकर बारह वर्षीय एक लड़का (लहना सिंह) आठ वर्षीया एक लड़की को ताँगे के नीचे आने से बचाता है। दोनों सिक्ख हैं। लड़का लड़की से पूछता है- ‘तेरी कुड़माई (मंगनी) हो गई है, यह सुनकर लड़की ‘धत्’ कहकर भाग जाती है। वही लड़की बाद में धत् कहकर भागने की बजाय यह कहती है कि, ‘हाँ, कल हो गई। देखते नहीं- यह रेशम के फूलों वाला सालू?’ यह सुनकर लड़का हतप्रभ रह जाता है। इस प्रकार लड़का अपने हृदय में लड़की के प्रति उत्पन्न प्रेम को सहेजे रहता है।

 

3.अर्द्धनारीश्वर की कल्पना क्यों की गई होगी ?

उत्तरः अर्द्धनारीश्वर शंकर और पार्वती का काल्पनिक रुप है, जिसका आधा अंग पुरुष का और आधा अंग नारी का होता है। एक ही मूर्ति की दो आँखें, एक रसमयी और दूसरी विकराल, एक ही मूर्ति की दो भुजाएँ- एक त्रिशुल उठाये और दूसरी की पहुंची पर चूड़ियाँ एवं एक ही मूर्ति के दो पाँव, एक जरीदार साड़ी से आवृत और दूसरा बाघंबर से ढ़का हुआ, यह कल्पना निश्चय ही शिव और शक्ति के बीच पूर्ण समन्वय दिखाने को की गई होगी। प्र

 

4. नारी की पराधीनता कब से प्रारंभ हुई?  उत्तरः नारी की पराधीनता तब आरंभ हुई जब मानव जाति ने कृषि का आविष्कार किया। इसके चलते नारी घर में और पुरुष बाहर रहने लगा। यहाँ से जिंदगी दो टुकड़ों में बँट गई। नारी पराधीन हो गई। इस पराधीनता ने नर-नारी से वह सहज दृष्टि भी छीन लीं जो नर-मादा पक्षियों में थी। इस पराधीनता के कारण नारी के सामने अस्तित्व का संकट आ गया। उसके सुख और दुख, प्रतिष्ठा और अपमान, यहाँ तक कि जीवन और मरण पुरुष की मर्जी पर टिकने लगा।

 

 

5.मालती के पति महेश्वर की छवि उद्घाटित करें।

उत्तरः महेश्वर किसी पहाड़ी कस्बे में एक सरकारी डिस्पेंशरी में डॉक्टर है। रोज डिस्पेशरी जाना, मरीजों को देखना, गैंग्रीन का ऑपरेशन करना, थका-मादा घर लौटना, यही महेश्वर की दिनचर्या है।

महेश्वर हर तीसरे-चौथे दिन एक गैंग्रीन का ऑपरेशन करता है। किन्तु अपने घर में वहीं गैंग्रीन, वही एकरसता मुँह फैलाये उपस्थित है, जिसका हम कुछ नहीं बिगाड़ पाते। इस विरोधाभास और एकरसता को कहानी के भीतर संरचनात्मक स्तर पर बड़ी आत्मीयता और सहज अनुभूति से प्रतीकों, बिम्बों, परिवेशों और फ्लैश बैक के माध्यम से लेखक द्वारा व्यक्त किया गया है।

 

6. मालती के घर का वातावरण कैसा है?

अथवा, मालती के चरित्र का मनोवैज्ञानिक उद्घाटन प्रस्तुत करें। अथवा, ‘रोज’ कहानी में मालती को देखकर लेखक ने क्या सोचा ?

उत्तरः वातावरण, परिस्थिति और उसके प्रभाव में ढलते हुए एक गृहिणी के चरित्र का मनोवैज्ञानिक उद्घाटन अत्यंत कलात्मक रीति से लेखक यहाँ प्रस्तुत करता है। डॉक्टर पति के काम पर चले जाने के बाद का सारा समय मालती को घर में एकाकी काटना होता है। उसका दुर्बल, बीमार और चिड़चिड़ा पुत्र हमेशा सोता रहता है या रोता रहता है। मालती उसकी देखभाल करती हुई सुबह से रात ग्यारह बजे तक के घर के कार्यों में अपने को व्यस्त रखती है। उसका जीवन ऊब और उदासी के बीच यंत्रवत चल रहा है। किसी तरह के मनोविनोद, उल्लास उसके जीवन में नहीं रह गये हैं जैसे वह अपने जीवन का भार ढोने में ही घुल रही हो।

 

7.ओ सदानीरा पाठ में आए नौका विहार प्रसंग का वर्णन करें। 

उत्तर : नौका विहार प्रसंगः पाठ में लेखक ने सरैयामन में नौका विहार का वर्णन किया

है। सरैयामन चम्पारण के बेतिया नगर से चार मील दूरी पर है। यह रास्ता उबड़-खाबड़ है जो एक जंगल के बीच से गुजरता है। जिसमें सागवान, युकलिप्टस, आम आदि के पेड़ जंगल विभाग की देख-रेख में लगाये जा रहे हैं। इसके एक मील आगे सरैयामन अवस्थित है। जहाँ विशाल ताल के तीन ओर जल एवं एक ओर टापू सा दृश्य बड़ा मनोरम प्रतीत हो रहा था। नौका विहार के क्रम में चाँद की शीतल छाया कभी-कभी नौका पर पड़ रही थी। इसका जल बड़ा स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक है। सरैयामन के किनारे की ओर जामुन के वृक्ष लगे थे जिसका फल सरैयामन में झड़कर गिरता है। जो इसके जल को स्वास्थ्यवर्धक बनाता है। कई बीमार लोग इसका जल अपने घरों में पीने में रखते हैं।

 

8. चम्पारण में शिक्षा की व्यवस्था के लिए गाँधीजी ने क्या किया ? 

उत्तरः गाँधीजी का विचार था कि ग्रामीण बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था किये बिना

केवल आर्थिक समस्याओं को सुलझाने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए उन्होंने तीन गाँवों में आश्रम विद्यालय स्थापित किए बड़हरवा, मधुबन और भितिहरवा। कुछ निष्ठावान कार्यकर्ताओं को तीनों गाँवों में तैनात किया। बड़हरवा के विद्यालय का कार्यभार श्री बवनजी गोखले और उनकी विदुषी अवंतिकाबाई गोखले को सौंपा। मधुबन में नरहरिदास पारिख और उनकी पत्नी तथा अपने सेक्रेटरी महादेव देसाई को नियुक्त किया। भितिहरवा आश्रम का कार्य वयोवृद्ध डॉक्टर देव और सोमन जी ने चलाया। बाद में पुंडलिक जी गए। स्वयं कस्तूरबा भितिहरवा आश्रम में रहीं।

 

 

9.शिक्षा का अर्थ क्या है एवं इसके क्या कार्य हैं?

उत्तरः मानव जीवन का सर्वांगीण विकास प्राप्त करने का अर्थ शिक्षा है। इसमें मनुष्य की साक्षरता, बुद्धिमता, जीवन-कौशल व अन्य सभी समाजोपयोगी गुण पाये जाते हैं। शिक्षा के अंतर्गत विद्यार्थी का विद्यालय जाना, विविध विषयों की पढ़ाई करना, परीक्षाएँ उत्तीर्ण होना जीवन में ऊँचा स्थान प्राप्त करना, दूसरों से स्पर्धा करना, संघर्ष करना एवं जीवन के सभी पहलुओं का समुचित अध्ययन करना ये सारी चीजें शिक्षा के अंतर्गत आती है। साथ ही जीवन समझना शिक्षा है।

 

शिक्षा के कार्य : शिक्षा का कार्य केवल मात्र कुछ नौकरियों और व्यवसायों के योग्य बनाना ही नहीं बल्कि संपूर्ण जीवन-प्रक्रिया को वाल्यकाल से ही समझने में सहयोग करना है एवं स्वतंत्रतापूर्वक परिवेश हेतु प्रेरित करना

 

10.तिरिछ’ क्या है? कहानी में यह किसका प्रतीक है?

उत्तरः पाठ में वर्णित ‘तिरिछ’ संभवतः एक विषैला जन्तु नहीं, अपितु मानव की हिंसात्मक पाश्विक प्रवृत्तियाँ प्रतीत होती है। यद्यपि तिरिछ एक खतरनाक विषैला जानवर होता है जिसके काटने से मनुष्य की प्रायः मृत्यु हो जाती है। किन्तु मानव की हिंसक तथा दानवी गतिविधियाँ उससे अधिक, अत्यंत घातक तथा मर्मान्तक (असह्य) पीड़ादायी होती है। उससे मनुष्य घुल-घुलकर मौत के मुँह में चला जाता है। प्रस्तुत कहानी में ‘तिरिछ’ एक प्रतीक है। यह समाज में व्याप्त विकृति का प्रतिनिधित्व करता है।

 

By RK EXPERT STUDY 

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