Bihar Board 12th Hindi Vvi Subjective Question Answer 2026
निबंध
1.(iii).शिक्षक दिवस (Teachers’ Day)
शिक्षक दिवस हर साल 5 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिन भारत के पूर्व राष्ट्रपति, विद्वान, दार्शनिक और महान शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती का प्रतीक है [1]। इस अवसर पर, छात्र और पूरा देश शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करता है और शिक्षा के क्षेत्र में उनके बहुमूल्य योगदान को स्वीकार करता है
महत्व
शिक्षक हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे न केवल हमें अकादमिक ज्ञान प्रदान करते हैं, बल्कि वे हमें सही और गलत के बीच अंतर करना भी सिखाते हैं। शिक्षक छात्रों का मार्गदर्शन करते हैं और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हैं। वे एक छात्र के जीवन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनके भविष्य की नींव रखते हैं।
उत्सव
स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षक दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। छात्र अपने शिक्षकों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम, नाटक और अन्य मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन करते हैं। वे अपने शिक्षकों को उपहार, फूल और हस्तनिर्मित कार्ड देकर उनके प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते हैं। कई जगहों पर, छात्र एक दिन के लिए शिक्षक की भूमिका निभाते हैं, जिससे उन्हें शिक्षण की चुनौतियों और जिम्मेदारियों को समझने में मदद मिलती है
निष्कर्ष
शिक्षक दिवस हमें अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने का अवसर देता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि एक समाज के निर्माण में शिक्षकों का योगदान अमूल्य है। यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपने शिक्षकों का सम्मान करें और उनके द्वारा दिए गए ज्ञान और मूल्यों को जीवन में अपनाएं।
2. निम्नलिखित में से किन्हीं दो अवतरणों की सप्रसंग व्याख्याः
(ⅰ) “सच है, जब तक मनुष्य बोलता नहीं तब तक उसका गुण-दोष प्रकट नहीं होता।
संदर्भः यह पंक्ति बालकृष्ण भट्ट द्वारा लिखित निबंध ‘बातचीत’ से ली गई है।
भावार्थः लेखक के अनुसार, वाक्शक्ति (बोलने की शक्ति) ही मनुष्य के भीतर छिपे चरित्र और स्वभाव को प्रकट करती है। जब तक कोई व्यक्ति चुप रहता है, तब तक उसके गुण (अच्छाई) और दोष (बुराई) दोनों ढके रहते हैं। बोलना ही वह माध्यम है जिससे उसके आंतरिक विचार, विवेक और संस्कार सामने आते हैं, और तब ही सही मायनों में उसका मूल्यांकन किया जा सकता है।
(ii) “बिना फेरे घोड़ा बिगड़ता है और बिना लड़े सिपाही” संदर्भः यह उक्ति चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी ‘उसने कहा था’ से उद्धत है। भावार्थ: यह लहना सिंह द्वारा बोला गया एक संवाद है, जो अभ्यास और सतत क्रियाशीलता के
3.दिनांक [पत्र लिखने की तारीख]
सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय/महोदया,
[विद्यालय का नाम],
[विद्यालय का पता/शहर]
विषय: विद्यालय के शौचालयों की समुचित साफ-सफाई व्यवस्था हेतु अनुरोध।
आदरणीय महोदय/महोदया,
सविनय निवेदन यह है कि मैं [आपका नाम], [आपकी कक्षा और अनुभाग, यदि लागू हो] का छात्र/छात्रा हूँ। मैं आपका ध्यान विद्यालय के शौचालयों की दयनीय स्थिति की ओर आकर्षित करना चाहता/चाहती हूँ।
विद्यालय के शौचालयों की साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था हेतु विनम्र निवेदन है।
स्वच्छता हमारे स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि कृपया इस मामले को गंभीरता से लें और विद्यालय के शौचालयों की नियमित और समुचित साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि छात्रों को स्वच्छ और स्वास्थ्यकर वातावरण मिल सके।
आपकी इस कृपा के लिए हम आपके अत्यंत आभारी रहेंगे।
धन्यवाद।
आपका आज्ञाकारी शिष्य/शिष्या,
[आपका नाम]
4. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं पाँच के उत्तर दें।
(i) बालकृष्ण भट्ट के अनुसार वाक्शक्ति न होती तो क्या होता ?
उत्तर _बालकृष्ण भट्ट के अनुसार, यदि मनुष्य में वाक्शक्ति (बोलने की शक्ति) न होती, तो यह समस्त सृष्टि गूँगी प्रतीत होती। सब लोग चुपचाप बैठे रहते और वे एक-दूसरे के सुख-दुख, अनुभव और भावों का आदान-प्रदान न कर पाते। इससे सृष्टि का विकास रुक जाता और जीवन निष्क्रिय हो जाता।
(ii) लहना सिंह के गाँव में आया तुर्की मौलवी क्या कहता था ?
उत्तर _’उसने कहा था’ कहानी के अनुसार, लहना सिंह के गाँव में आया तुर्की मौलवी कहता था कि जर्मनी के लोग बड़े पंडित हैं। वह वेद पढ़कर विमान चलाने की विद्या जान गए हैं और अब वे लोग ही हिंदुस्तान में आएंगे तथा गौ-हत्या बंद करवाएंगे।।
(iii) जयप्रकाश नारायण कम्युनिस्ट पार्टी में पार्टी में क्यों नहीं शामिल हुए
उत्तर _’जयप्रकाश नारायण ने कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल होने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि उनका दृष्टिकोण साम्यवाद की कट्टरता की बजाय एक लोकतांत्रिक और जनतांत्रिक सुधारवादी दृष्टिकोण था
(v) ‘गैंग्रीन’ क्या है ? ‘रोज’ शीर्षक कहानी के अनुसार उत्तर दें ।
उत्तर: गैंग्रीन एक खतरनाक बीमारी है। यह चुभे हुए काँटे को नहीं निकालने के कारण होती है। जो नासूर बन जाता है, और ऑपरेशन करने के बाद ही ठीक हो पाता है। काँटा अधिक दिन तक शरीर में रह जाने के कारण अपना विष शरीर में छोड़ता है
(vi) मलिक मुहम्मद जायसी के अनुसार ‘रकत कै लेई’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर:मलिक मुहम्मद जायसी के अनुसार, ‘रकत कै लेई’ का अर्थ है “खून से सने या खून के लेप”। यह वाक्यांश प्रेम की पीड़ा और गहरे संबंध को दर्शाता है, जो कविता में खून के लेप और आँसुओं से भीगा हुआ है।
5. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर दें :
(i) संघर्ष समितियों से जयप्रकाश नारायण की क्या अपेक्षाएँ हैं ? ‘संपूर्ण शीर्षक पाठ के अनुसार लिखें ।
उत्तर_संघर्ष समितियों से जयप्रकाश नारायण की अपेक्षाएँ थीं कि वे देश में व्याप्त भ्रष्टाचार, अत्याचार और अव्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करें, जनहित की रक्षा करें, सामाजिक और राजनीतिक सुधारों को लागू करें, जनता को संगठित और जागरूक करें, और लोकतंत्र को मजबूत करें। इसके साथ ही, वे यह भी चाहते थे कि सभी संघर्ष अहिंसात्मक और नैतिक मूल्यों पर आधारित हों।
(ii) शिक्षा का क्या अर्थ है एवं इसके क्या कार्य हैं ?
उत्तर_शिक्षा का अर्थ एक व्यवस्थित प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति ज्ञान, कौशल, मूल्य और अनुभवों को प्राप्त करता है, जिससे उसका व्यक्तित्व और व्यवहार विकसित होता है। यह जीवन भर चलने वाली एक ऐसी प्रक्रिया है जो औपचारिक (जैसे स्कूल) और अनौपचारिक (जैसे परिवार, समाज) दोनों साधनों से होती है। शिक्षा के प्रमुख कार्यों में व्यक्ति को सभ्य और सुसंस्कृत नागरिक बनाना, उसकी शारीरिक, मानसिक और नैतिक क्षमताओं का विकास करना, और समाज में प्रगति लाना शामिल है।
(iii) एकांकी और नाटक में क्या अंतर है ? संक्षेप में बताएँ ।
उत्तर_एकांकी और नाटक में मुख्य अंतर यह है कि एकांकी एकल अंक (एक ही अंक) वाला होता है, जो एक ही कथा और घटना पर केंद्रित होता है, जबकि नाटक में कई अंक, एक से ज़्यादा कथाएँ और पात्र होते हैं। नाटक आकार में बड़ा और अधिक जटिल होता है, जबकि एकांकी छोटा और संक्षिप्त होता
9. ‘लहना सिंह’ का चरित्र-चित्रण करें।
उत्तर: लहना सिंह “उसने कहा था” कहानी का नायक है। वह एक बहादुर और कर्तव्यनिष्ठ सिपाही है। बचपन के प्रेम को याद रखते हुए, उसने सूबेदारनी को दिए गए वचन को निभाने के लिए अपने जीवन का बलिदान दे दिया। उसका चरित्र वीरता, त्याग, ईमानदारी और वचनबद्धता का अनूठा संगम है, जो पाठकों को गहराई तक प्रभावित करता है।
10. “विजय उत्सव मना रहे लोगों” को मरे हुए लोगों तथा सैनिकों का जरा भी ध्यान क्यों नहीं है?
उत्तर: यह प्रश्न कविता “हार-जीत” से है। कवि इस पंक्ति के माध्यम से बताना चाहते हैं कि विजय के नशे में चूर सत्ताधारी वर्ग और आम जनता मरे हुए सैनिकों के बलिदान को भूल जाती है। वे केवल जीत का जश्न मनाते हैं, जबकि उन सैनिकों के आश्रितों (परिवारों) पर क्या बीत रही है, इसका उन्हें जरा भी ख्याल नहीं होता। यह सत्ता की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
11. “उसने कहा था” कहानी में सूबेदारनी द्वारा कहे गए “जो कहा था सो कर दिया” कथन का क्या महत्त्व है?
उत्तर: “उसने कहा था” कहानी में, यह कथन लहना सिंह के चरित्र की महानता को दर्शाता है। लहना सिंह ने सूबेदारनी को वचन दिया था कि वह उसके पति (सूबेदार) और बेटे (बोधा सिंह) की रक्षा करेगा। युद्ध के दौरान, लहना सिंह ने अपने जीवन का बलिदान देकर भी अपने वचन का पालन किया। यह कथन उसकी कर्त्तव्यनिष्ठा, त्याग और प्रेम की गहराई को स्पष्ट करता है, और पूरी कहानी का केंद्रीय भाव है।
12. “जूठन” शीर्षक आत्मकथा में लेखक ओमप्रकाश वाल्मीकि ने दिन-रात मर-खपकर भी ‘पसीने की कीमत’ मात्र ‘जूठन’ क्यों कहा है?
उत्तर: इस कथन के माध्यम से लेखक ने दलित समाज की उस दयनीय स्थिति को उजागर किया है, जहाँ दिन-रात कठोर परिश्रम करने के बाद भी उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान नहीं मिलता था। उनके श्रम का मूल्य केवल बचा हुआ, जूठा भोजन (जूठन) होता था। यह कथन जातीय भेदभाव और शोषण की क्रूरता को दर्शाता है, जहाँ मेहनतकश लोगों की गरिमा को कुचला जाता था।
By RK EXPERT STUDY
